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कामरेड स्वामी मदन अग्रवाल

सभा की बैठक
ध्वजारोहण
सम्मान
उपवास

सभा

सवाल पूछने वाले
कभी अकेले नहीं होते।

सवाल। असहमति। विचार।किताब तक चलिए

अध्याय 1

आपकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा फ़ैसला किस डर ने लिया था?
01 / किताब48 अध्याय · 8 खंड

एक किताब, जो सवाल पूछती है

विचारोंका विद्रोह

जवाब नहीं।

सिर्फ़ सवाल,
जो पीछा करते हैं।

विचारों का विद्रोह — आवरण
विचारों का विद्रोह — आवरण
जब तक समाज में अंतिम व्यक्ति सम्मानपूर्वक नहीं जीता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

आठ खंड, अड़तालीस अध्याय। हर अध्याय के अंत में दो सवाल — जिनका जवाब किताब नहीं देती।

आठों खंड देखिए
कामरेड स्वामी मदन अग्रवाल

उन्होंने धर्म
छोड़ा नहीं।

उन्होंने उसके
ठेकेदारों से
सवाल पूछे।

कामरेड से
स्वामी तक।

[ एक मोड़ की कहानी ]
जो नहीं बदला, वह सवाल था
पुरानी तस्वीर
पुरानी तस्वीर — उन्हीं के संग्रह से

पंद्रह की उम्र में उन्होंने भरी पंचायत में समाज के ठेकेदारों से कहा था कि आपके निर्णय चाँदी के जूते से प्रभावित होते हैं। बहिष्कार मिला, माफ़ी माँगने को कहा गया — बहिष्कार उन्होंने स्वीकार किया, माफ़ी नहीं माँगी। आपातकाल में फ़रार रहे, जनवादी युवा शक्ति के प्रदेशाध्यक्ष बने, अधिकारियों से रिश्वतें वापस दिलवाईं। फिर लाल झंडे से भगवा वस्त्र तक — बदला सिर्फ़ रास्ता, सवाल वही रहा। ‘विचारों का विद्रोह’ उसी सवाल का लेखा-जोखा है।

पूरी यात्रा
02 / लेखनक़लम से स्याही तक
पढ़ते हुए
पढ़ते हुए
पुरानी तस्वीर

हर सवाल, एक चोट।

कुछ बातें
कही नहीं जातीं।
लिखनी पड़ती हैं।

48

मुझसे सहमत होने की कोशिश न करें। मुझसे लड़िए।

लेखन पढ़िए

अध्याय 24

कोई ऐसी बात है जो आप वर्षों से कहना चाहते हैं और नहीं कह पाए? उसे न कहने की क़ीमत आप अब तक कितनी चुका चुके हैं?
03 / मोड़आग वही, रुख़ दूसरा

कामरेडस्वामी

एक ही सवाल, दो रास्ते

लाल झंडे से भगवा वस्त्र तक — बदला सिर्फ़ रास्ता। सवाल वही रहा: आख़िरी आदमी को न्याय कब मिलेगा?

04 / आठ खंडभीतर से बाहर तक
किताब का नक़्शा

खंड

अड़तालीस अध्याय · सौ से ज़्यादा सवाल

हर खंड
एक आईना।

जो सबसे ज़्यादा चुभे, वहीं से शुरू कीजिए।

खोलकर देखिए
खंड 1 · 6 अध्याय

डर, लालच, अहंकार, क्रोध — बाहर की हर व्यवस्था यहीं से शुरू होती है।

खंड 2 · 6 अध्याय

विवाह, परिवार, अपेक्षा — जहाँ सबसे ज़्यादा प्रेम है, वहीं सबसे ज़्यादा क़ब्ज़ा भी।

खंड 3 · 6 अध्याय

जाति, ग़रीबी, पैसा, स्कूल, परंपरा, भीड़ — वे सच जो सब जानते हैं, कोई कहता नहीं।

खंड 4 · 6 अध्याय

कम्युनिज़्म ने आँख दी, फिर सवाल छीनने चाहे। यह खंड लेखक का अपना हिसाब है।

खंड 5 · 6 अध्याय

झगड़ा ईश्वर से नहीं, ठेकेदारों से है। धर्म संगठन है; अध्यात्म अकेली यात्रा।

खंड 6 · 6 अध्याय

मोबाइल, सफलता, वृद्धाश्रम, दिखावा, पर्यावरण — आज के सवाल, सीधे।

खंड 7 · 6 अध्याय

स्वर्ग-नरक, कर्म, श्राद्ध — पुराने लालच और पुराने डर की जाँच।

खंड 8 · 6 अध्याय

पाँच बड़ी ग़लतियाँ, जो अधूरा रह गया, और आख़िरी बात — बिना सार, बिना उपदेश।

05 / विचाररुकिए। पढ़िए।
उनकी अपनी पंक्तियाँ

विचार

किताब से चुनी हुई पंक्तियाँ

छोटी पंक्तियाँ, लंबी चोट

उनके शब्दों में।

अध्याय 47

आपकी अधूरी सूची में सबसे ऊपर कौन-सा नाम है?
06 / विश्वास

सिर्फ़ किताब नहीं।एक विद्रोह।

उनके लिए जो सवाल पूछने से डरते नहीं।
जो परंपरा मानते हैं, पर आँख बंद करके नहीं।
जो असहमत होने को अपराध नहीं मानते।

अपना सवाल पूछिए