डर, लालच, अहंकार, क्रोध — बाहर की हर व्यवस्था यहीं से शुरू होती है।




अध्याय 1
आपकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा फ़ैसला किस डर ने लिया था?
एक किताब, जो सवाल पूछती है
विचारोंका विद्रोह
सिर्फ़ सवाल,
जो पीछा करते हैं।

जब तक समाज में अंतिम व्यक्ति सम्मानपूर्वक नहीं जीता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
आठ खंड, अड़तालीस अध्याय। हर अध्याय के अंत में दो सवाल — जिनका जवाब किताब नहीं देती।
आठों खंड देखिए
उन्होंने धर्म
छोड़ा नहीं।
उन्होंने उसके
ठेकेदारों से
सवाल पूछे।
कामरेड से
स्वामी तक।
[ एक मोड़ की कहानी ]
पंद्रह की उम्र में उन्होंने भरी पंचायत में समाज के ठेकेदारों से कहा था कि आपके निर्णय चाँदी के जूते से प्रभावित होते हैं। बहिष्कार मिला, माफ़ी माँगने को कहा गया — बहिष्कार उन्होंने स्वीकार किया, माफ़ी नहीं माँगी। आपातकाल में फ़रार रहे, जनवादी युवा शक्ति के प्रदेशाध्यक्ष बने, अधिकारियों से रिश्वतें वापस दिलवाईं। फिर लाल झंडे से भगवा वस्त्र तक — बदला सिर्फ़ रास्ता, सवाल वही रहा। ‘विचारों का विद्रोह’ उसी सवाल का लेखा-जोखा है।
पूरी यात्राअध्यात्म
धर्म संगठन है, अध्यात्म अकेली यात्रा। उनका झगड़ा ईश्वर से नहीं, ठेकेदारी से रहा है।
02विचार
“जिस विचार से आप सवाल नहीं पूछ सकते, वह आपका विचार नहीं है। वह आपका मालिक है।”
03साहित्य
अड़तालीस अध्यायों की एक पुस्तक, जो जवाब नहीं — सवाल छोड़कर जाती है।
04सेवा
किसी भी काम की पहली कसौटी एक ही — क्या वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है।


हर सवाल, एक चोट।
कुछ बातें
कही नहीं जातीं।
लिखनी पड़ती हैं।
मुझसे सहमत होने की कोशिश न करें। मुझसे लड़िए।
लेखन पढ़िएअध्याय 24
कोई ऐसी बात है जो आप वर्षों से कहना चाहते हैं और नहीं कह पाए? उसे न कहने की क़ीमत आप अब तक कितनी चुका चुके हैं?
खंड

हर खंड
एक आईना।
जो सबसे ज़्यादा चुभे, वहीं से शुरू कीजिए।
खोलकर देखिएविवाह, परिवार, अपेक्षा — जहाँ सबसे ज़्यादा प्रेम है, वहीं सबसे ज़्यादा क़ब्ज़ा भी।
जाति, ग़रीबी, पैसा, स्कूल, परंपरा, भीड़ — वे सच जो सब जानते हैं, कोई कहता नहीं।
कम्युनिज़्म ने आँख दी, फिर सवाल छीनने चाहे। यह खंड लेखक का अपना हिसाब है।
झगड़ा ईश्वर से नहीं, ठेकेदारों से है। धर्म संगठन है; अध्यात्म अकेली यात्रा।
मोबाइल, सफलता, वृद्धाश्रम, दिखावा, पर्यावरण — आज के सवाल, सीधे।
स्वर्ग-नरक, कर्म, श्राद्ध — पुराने लालच और पुराने डर की जाँच।
पाँच बड़ी ग़लतियाँ, जो अधूरा रह गया, और आख़िरी बात — बिना सार, बिना उपदेश।
विचार


छोटी पंक्तियाँ, लंबी चोट
उनके शब्दों में।
विचार ही वास्तविक क्रांति है।पूरा पढ़िए
जब तक समाज में अंतिम व्यक्ति सम्मानपूर्वक नहीं जीता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।पूरा पढ़िए
जिस विचार से आप सवाल नहीं पूछ सकते, वह आपका विचार नहीं है। वह आपका मालिक है।पूरा पढ़िए
आदमी सत्ता में पहुँचकर बदलता नहीं। सत्ता सिर्फ़ यह दिखा देती है कि वह असल में था क्या।पूरा पढ़िए
आज़ादी झंडे से नहीं मिलती। वह उस खिड़की पर मिलती है जहाँ आम आदमी अपना काम कराने जाता है।पूरा पढ़िए
हमने अपने ग्रंथों को पढ़ा नहीं। हमने उन्हें पूजा है। और पूजा सबसे सुरक्षित तरीक़ा है किसी बात से बचने का।पूरा पढ़िए
अध्याय 47
आपकी अधूरी सूची में सबसे ऊपर कौन-सा नाम है?

सिर्फ़ किताब नहीं।एक विद्रोह।
उनके लिए जो सवाल पूछने से डरते नहीं।
जो परंपरा मानते हैं, पर आँख बंद करके नहीं।
जो असहमत होने को अपराध नहीं मानते।